खाजूवाला/बीकानेर संवाददाता गोपी बेनीवाल
खाजूवाला क्षेत्र में बिजली विभाग की कार्यप्रणाली को लेकर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। एक पेट्रोल पंप के विद्युत कनेक्शन से जुड़े मामले में विभागीय कर्मचारियों और ठेकेदार की कथित मिलीभगत से ट्रांसफार्मर को मूल स्थान से हटाकर दूसरी जगह शिफ्ट करने तथा करीब 25 मीटर ऊंचे लोहे के टावर पोल को खुर्द-बुर्द करने के आरोप सामने आए हैं।प्राप्त जानकारी के अनुसार, पेट्रोल पंप संचालक ने नियमानुसार डिमांड राशि जमा करवाकर सुरक्षा मानकों के अनुरूप ट्रांसफार्मर एवं करीब 25 मीटर ऊंचे लोहे के टावर पोल पर विद्युत कनेक्शन लिया था। आरोप है कि हाल ही में विद्युत विभाग के AEN, JEN और ठेकेदार रतिराम द्वारा पेट्रोल पंप संचालक की अनुमति के बिना ट्रांसफार्मर को उसके मूल स्थान से हटाकर दूसरी जगह स्थापित कर दिया गया।25 मीटर का टावर हटाकर 9 मीटर के पोल पर ट्रांसफार्मरमामले में सबसे बड़ा सवाल ट्रांसफार्मर की ऊंचाई और सुरक्षा को लेकर उठ रहा है। आरोप है कि जहां पहले ट्रांसफार्मर करीब 25 मीटर ऊंचे लोहे के टावर पोल पर स्थापित था, वहीं अब उसे महज 9 मीटर ऊंचे सीमेंट के पोल पर लगा दिया गया है।पेट्रोल पंप जैसे संवेदनशील स्थान के नजदीक विद्युत उपकरण की ऊंचाई में इस तरह की कमी किए जाने से सुरक्षा को लेकर स्थानीय लोगों में चिंता है। लोगों का कहना है कि यदि निर्धारित सुरक्षा मानकों में बदलाव किया गया है तो इसकी स्वीकृति किस स्तर से ली गई और इसके पीछे क्या कारण था—यह जांच का विषय है।टावर पोल कहां गया? उठ रहे बड़े सवालमामले में दूसरा गंभीर सवाल पुराने लोहे के टावर पोल को लेकर है। आरोप है कि ट्रांसफार्मर शिफ्ट करने के दौरान करीब 25 मीटर ऊंचे लोहे के टावर को तोड़कर खुर्द-बुर्द कर दिया गया। यदि यह विभागीय संपत्ति थी तो उसे हटाने, तोड़ने और निस्तारण की अनुमति किस अधिकारी ने दी? और यदि यह निजी सामग्री थी तो बिना अनुमति उसे हटाने का अधिकार किसे था?इन सवालों का जवाब विभागीय जांच के बाद ही स्पष्ट हो सकेगा।स्थानीय लोगों ने निष्पक्ष जांच की उठाई मांगमामले को लेकर पेट्रोल पंप संचालक और स्थानीय नागरिकों में नाराजगी है। लोगों ने उच्च अधिकारियों से पूरे प्रकरण की निष्पक्ष एवं तकनीकी जांच करवाने की मांग की है। साथ ही ट्रांसफार्मर शिफ्ट करने की स्वीकृति, सुरक्षा मानकों, पुराने टावर पोल की स्थिति तथा कार्य में शामिल अधिकारियों एवं ठेकेदार की भूमिका की जांच की मांग उठाई गई है।स्थानीय लोगों का कहना है कि यदि नियमों की अनदेखी कर ट्रांसफार्मर को कम ऊंचाई पर स्थापित किया गया है तो यह केवल विभागीय लापरवाही का मामला नहीं, बल्कि भविष्य में किसी गंभीर दुर्घटना की आशंका से भी जुड़ा विषय है।अब देखने वाली बात यह होगी कि बिजली विभाग के उच्चाधिकारी इस पूरे मामले की जांच कब शुरू करते हैं और 25 मीटर के टावर पोल को हटाकर ट्रांसफार्मर को 9 मीटर के पोल पर लगाने का आधार क्या था, इसका जवाब जनता के सामने कब आता है।
