3 जुलाई से शुरू होगा धर्म-पुण्य का आषाढ़ मास, 25 जुलाई से थम जाएंगी शहनाइयाँ; गुरु पूर्णिमा तक रहेंगे कई शुभ संयोग
पुष्कर। ज्योतिषाचार्य पंडित कैलाश नाथ दाधीच के अनुसार 3 जुलाई से 29 जुलाई तक आषाढ़ मास धर्म, दान और पुण्य का विशेष माह रहेगा। पंचांग और ज्योतिषीय गणना के अनुसार इस अवधि में अनेक प्रमुख व्रत, पर्व, जयंतियां और ग्रह परिवर्तन होंगे। आषाढ़ मास में आठ सर्वार्थ सिद्धि योग और दो अमृत योग बनने से धार्मिक अनुष्ठानों का विशेष महत्व रहेगा।
उन्होंने बताया कि 16 जुलाई को सूर्य कर्क राशि में प्रवेश करेंगे तथा भगवान जगन्नाथ रथ यात्रा का पर्व मनाया जाएगा। वहीं 16 जुलाई की रात्रि 1:27 बजे से देवगुरु बृहस्पति तारा अस्त हो जाएगा, जो 8 अगस्त तक रहेगा। इसके बाद 25 जुलाई को देवशयनी एकादशी के साथ चातुर्मास प्रारंभ होगा। गुरु तारा अस्त और चातुर्मास के प्रभाव से विवाह, उपनयन, गृह प्रवेश, भूमि पूजन, प्रतिष्ठा सहित अन्य मांगलिक कार्यों पर विराम लग जाएगा और शहनाइयां नहीं बजेंगी।
पंडित दाधीच ने बताया कि 14 जुलाई की अमावस्या पितृ कार्यों के लिए अत्यंत शुभ मानी गई है। इस दिन नारायण बलि, पिंडदान, तर्पण, दान-पुण्य और पितरों के निमित्त किए गए धार्मिक कार्यों का अक्षय फल प्राप्त होता है। आषाढ़ मास में दान-पुण्य, हवन-पूजन, तीर्थ स्नान, तीर्थ यात्रा और परिक्रमा का विशेष महत्व बताया गया है। 29 जुलाई को गुरु पूर्णिमा, वेदव्यास जयंती और संन्यासी चातुर्मास के साथ इस पुण्य मास का समापन होगा।

