उपखंड अधिकारी की पहल से दृष्टिबाधित दंपती को मिली करीब 30 हजार रुपए की बकाया पेंशन
पिड़ावा । सरकारी योजनाओं का लाभ जब किसी जरूरतमंद तक पहुंचता है तो वह महज एक भुगतान नहीं, बल्कि उसके जीवन में उम्मीद की किरण बन जाता है। ग्राम पंचायत कोटड़ी में आयोजित फॉलो-अप शिविर में ऐसा ही एक संवेदनशील मामला सामने आया, जहां करीब दो से ढाई वर्ष से पेंशन के लिए इंतजार कर रही पारी बाई भील की समस्या का समाधान हुआ। पारी बाई और उनके पति दोनों दृष्टिबाधित हैं। लंबे समय से तकनीकी समस्या के चलते पारी बाई की पेंशन बंद थी। आर्थिक रूप से कमजोर परिवार के लिए पेंशन की यह राशि बेहद महत्वपूर्ण थी, लेकिन बार-बार प्रयास के बावजूद समस्या का समाधान नहीं हो पा रहा था।
फॉलो-अप शिविर में जब यह मामला उपखंड अधिकारी दिनेश कुमार बाहालोत के सामने आया तो उन्होंने मामले को गंभीरता से लिया। उन्होंने संबंधित अधिकारियों से तत्काल संपर्क कर पेंशन शुरू करवाने के निर्देश दिए। प्रशासनिक प्रयासों के बाद पारी बाई की वर्षों से अटकी पेंशन बहाल हुई और करीब 30 हजार रुपए की बकाया राशि उनके बैंक खाते में जमा हो गई।
खाते में राशि पहुंचने की खबर मिलते ही पारी बाई के चेहरे पर खुशी लौट आई। लंबे इंतजार के बाद मिली इस राहत ने उनकी आंखों में उम्मीद और चेहरे पर मुस्कान ला दी। यह पल शिविर में मौजूद लोगों के लिए भी भावुक कर देने वाला रहा।
इस कार्य में ग्राम पंचायत कोटड़ी के सरपंच हरिराम गोचर, ई-मित्र संचालक प्रीतेश जैन तथा पेंशन अधिकारी लखन राठौर का भी सहयोग रहा।
सवाल सिर्फ पेंशन का नहीं, भरोसे का था। जब किसी गरीब और जरूरतमंद की परेशानी को अधिकारी संवेदनशीलता से सुनकर उसका समाधान करवाते हैं, तो सरकारी व्यवस्था के प्रति लोगों का भरोसा भी मजबूत होता है। पारी बाई के चेहरे की मुस्कान इस बात की गवाही देती नजर आई कि समय पर की गई प्रशासनिक पहल किसी परिवार के लिए कितनी बड़ी राहत बन सकती है।

