सावन का महीना : आस्था, भक्ति और प्रकृति के नवसृजन का पर्व लेखक – राजेश तंवर लाखेरी

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हिंदू धर्म में सावन का महीना विशेष धार्मिक, आध्यात्मिक और सांस्कृतिक महत्व रखता है। सावन आते ही चारों ओर हरियाली छा जाती है, वर्षा की बूंदों से धरती खिल उठती है और वातावरण में भक्ति का रंग दिखाई देने लगता है। मंदिरों में भगवान शिव के जयकारे गूंजते हैं तथा श्रद्धालु भगवान भोलेनाथ का जलाभिषेक कर सुख-समृद्धि और परिवार की खुशहाली की कामना करते हैं।सावन का महीना मुख्य रूप से भगवान शिव को समर्पित माना जाता है। इस दौरान शिव मंदिरों में सुबह से ही श्रद्धालुओं की कतार लगने लगती है। भक्त शिवलिंग पर जल, दूध, बेलपत्र, धतूरा, आक के पुष्प आदि अर्पित करते हैं। सावन के प्रत्येक सोमवार को विशेष महत्व दिया जाता है और अनेक श्रद्धालु सोमवार का व्रत रखते हैं।*समुद्र मंथन से जुड़ी है सावन की कथा*पौराणिक कथाओं के अनुसार देवताओं और असुरों द्वारा किए गए समुद्र मंथन के दौरान अनेक रत्नों के साथ हलाहल विष भी निकला। इस विष की तीव्रता इतनी भयंकर थी कि उससे समस्त सृष्टि के विनाश का खतरा उत्पन्न हो गया। देवताओं और समस्त प्राणियों की रक्षा के लिए भगवान शिव ने उस विष को अपने कंठ में धारण कर लिया।विष के प्रभाव से भगवान शिव का कंठ जलने लगा। तब देवताओं ने भगवान शिव को जल अर्पित किया। इसी पौराणिक प्रसंग को सावन में भगवान शिव के जलाभिषेक की परंपरा से जोड़ा जाता है। श्रद्धालुओं की मान्यता है कि सावन में शिवलिंग पर जल चढ़ाने से भगवान शिव की कृपा प्राप्त होती है और जीवन के कष्ट दूर होते हैं।*सावन और माता पार्वती की तपस्या*सावन का संबंध माता पार्वती की कठोर तपस्या से भी माना जाता है। मान्यता है कि माता पार्वती ने भगवान शिव को पति रूप में प्राप्त करने के लिए कठोर तपस्या की थी। उनकी भक्ति और तपस्या से प्रसन्न होकर भगवान शिव ने उन्हें स्वीकार किया। इसी कारण सावन में महिलाएं और युवतियां भी विशेष रूप से भगवान शिव और माता पार्वती की पूजा करती हैं तथा सुखी दांपत्य जीवन की कामना करती हैं।*प्रकृति के श्रृंगार का महीना*सावन केवल धार्मिक आस्था का महीना ही नहीं, बल्कि प्रकृति के नवसृजन का भी प्रतीक है। बारिश के कारण खेतों में हरियाली दिखाई देती है, पेड़-पौधों पर नई कोंपलें आती हैं और वातावरण मनमोहक हो जाता है। किसानों के लिए भी सावन का विशेष महत्व है, क्योंकि वर्षा कृषि और फसलों के लिए जीवनदायिनी होती है।गांवों और कस्बों में सावन के दौरान झूले, सावन के गीत और लोक परंपराएं वातावरण को उत्सवमय बना देती हैं। इसके साथ ही तीज जैसे पर्व भी सावन की सांस्कृतिक सुंदरता को बढ़ाते हैं।*कांवड़ यात्रा और शिव भक्ति*सावन में कांवड़ यात्रा भी श्रद्धा का प्रमुख केंद्र रहती है। शिव भक्त दूर-दूर से पवित्र नदियों का जल कांवड़ में लेकर आते हैं और भगवान शिव का अभिषेक करते हैं। रास्ते में जगह-जगह कांवड़ यात्रियों के लिए सेवा शिविर लगाए जाते हैं। इससे धार्मिक आस्था के साथ-साथ सेवा और सामाजिक सहयोग की भावना भी मजबूत होती है।सावन हमें क्या संदेश देता है?सावन हमें केवल पूजा-पाठ का संदेश नहीं देता, बल्कि त्याग, संयम, सेवा, प्रकृति संरक्षण और सकारात्मक जीवन की प्रेरणा भी देता है। भगवान शिव का शांत स्वरूप हमें कठिन परिस्थितियों में भी धैर्य बनाए रखने की सीख देता है। शिव द्वारा विष को अपने कंठ में धारण करना यह संदेश देता है कि मनुष्य को दूसरों के हित के लिए कठिनाइयों का सामना करने की भावना रखनी चाहिए।सावन में शिवलिंग पर जल चढ़ाने की परंपरा को यदि आध्यात्मिक दृष्टि से देखें तो यह अपने भीतर के क्रोध, अहंकार, लोभ और नकारात्मक विचारों को त्यागकर मन को शांत करने का प्रतीक भी माना जा सकता है।सावन इसलिए केवल एक महीना नहीं, बल्कि भारतीय संस्कृति में आस्था, भक्ति, प्रकृति, लोक परंपरा और सामाजिक सद्भाव का अनूठा संगम है। बारिश की बूंदों के साथ जब मंदिरों में “हर हर महादेव” और “ॐ नमः शिवाय” के जयकारे गूंजते हैं, तो पूरा वातावरण शिवमय हो जाता है।

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