रिपोर्ट लेखराज शर्मा बारां
9783937493
देवरी 6 अगस्त, बारां जिले के अंतिम छोर पर बसे सरकारी स्कूलों की स्थिति चिंता बढ़ाने वाली है। यहां सरकारी विद्यालय आज भी बिना पक्के भवन के संचालित हो रहे हैं। इन स्कूलों में पढ़ने वाले बच्चे बारिश सर्दी और भीषण गर्मी में खुले आसमान के नीचे घास फूस की झोपड़ी में पढ़ाई करने को मजबूर हैं। कहने को तो विद्यार्थी देश का भविष्य माने जाते हैं लेकिन शिक्षा विभाग की अनदेखी की वजह से देवरी क्षेत्र के राजकीय प्राथमिक विद्यालय सनगवां में करीब 53 बच्चों का नामांकन है लेकिन उन बच्चों को बैठने की सुविधा उत्तम नहीं है। इसलिए ग्रामीणों के सहयोग से विद्यालय परिसर के मैदान में घास फूस लकड़ियों से टापरी बनाकर उस पर तिरपाल डालकर बच्चों को बैठने की सुविधा बना दी। जिसमें अध्यापकों द्वारा पढ़ाई कार्य किया जाता है। यह समस्या देश की बुनियादी शिक्षा व्यवस्था और प्रशासनिक ढिलाई को उजागर करती है।वहीं शिक्षकों को भी पढ़ाने और शिक्षण सामग्री सुरक्षित रखने में काफी दिक्कत आती है। वहीं मां वाडी केंद्र में ऑफिस बना रखी है।
करीब 13वर्ष पहले विद्यालय का निर्माण, लिपापोती की वजह से नहीं टिका अधिक समय।
ग्रामीणों के अनुसार राजकीय प्राथमिक विद्यालय सनगवां का क्षतिग्रस्त भवन करीब 13वर्ष पहले लाखों रुपए की लागत से इस विद्यालय भवन का निर्माण कार्य किया लेकिन विभाग ओर ठेकेदार की मिलीभगत से कार्य की गुणवत्ता में लीपापोती कर दी जिससे विद्यालय भवन लंबे समय तक नहीं टिका।
अभिभावकों में नाराजगी
स्थानीय ग्रामीण और अभिभावक लंबे समय से पक्का भवन बनाने की मांग कर रहे हैं ताकि बच्चे सुरक्षित माहौल में पढ़ सकें. फिलहाल मौसम की मार के बीच बच्चों की पढ़ाई जारी है। यह स्थिति सरकारी स्कूलों में बुनियादी सुविधाओं की कमी को उजागर करती है जहां भवन , बिजली और शौचालय जैसी मूल जरूरतें भी पूरी नहीं हो पा रही हैं।
कई बार कर चुके शिकायत लेकिन नहीं हुआ समाधान
ग्रामीण सुरेश, उदय, महेंद्र, परशु सहरिया
एस एम सी अध्यक्ष छोटे राम आदि लोगो ने बताया कि इस नवीन विद्यालय भवन निर्माण के लिए ग्रामीणों ने ग्राम पंचायत बीलखेड़ा डांग ग्रामीण सेवा शिविर में लिखित रूप से तहसीलदार को शिकायत दर्ज कराई , उपखंड अधिकारी को भी ग्रामीणों ने शाहाबाद पहुंचकर लिखित में सूचना दी कि हमारे गांव में स्कूल भवन क्षतिग्रस्त हो गया है जिससे बच्चों को पढ़ने के लिए नवीन विद्यालय भवन निर्माण कार्य किया जाएं। लेकिन अभी तक इस संबंध में किसी भी अधिकारी ने कोई कार्यवाही नहीं की।
