जलवायु सुधार आज की सबसे बड़ी जरूरत
सोलर मैन ऑफ इंडिया प्रो. चेतन सोलंकी ने युवाओं को दिखाई सतत भविष्य की राह*अजमेर/राहुल कुमार वर्मा“इस समय जलवायु सुधार के लिए सही कदम उठाना ही सबसे आवश्यक है।” इस संदेश के साथ आईआईटी बॉम्बे के पूर्व प्रोफेसर और ‘सोलर मैन ऑफ इंडिया’ के नाम से प्रसिद्ध प्रो. चेतन सिंह सोलंकी ने विद्यार्थियों एवं अकादमिक समुदाय से जिम्मेदार उपभोग की आदतें अपनाने और जलवायु परिवर्तन की चुनौती से निपटने के लिए सार्थक कदम उठाने का आह्वान किया।राजस्थान केंद्रीय विश्वविद्यालय के स्कूल ऑफ अर्थ साइंसेज की ओर से प्रो. सोलंकी के साथ प्रेरणादायी एवं विचारोत्तेजक संवाद सत्र आयोजित किया गया। प्रो. सोलंकी वर्ष 2020 से क्लाइमेट सत्याग्रह यात्रा के माध्यम से सतत एवं पर्यावरण अनुकूल भविष्य के लिए जन-जागरूकता तथा सामूहिक प्रयासों को प्रोत्साहित कर रहे हैं।*जिम्मेदार व्यवहार से ही पर्यावरणीय चुनौतियों का समाधान*कुलपति प्रो. आनंद भालेराव ने कहा कि पर्यावरणीय चुनौतियों का समाधान केवल तकनीकी उपायों से संभव नहीं है। इसके लिए प्रत्येक व्यक्ति के जिम्मेदार व्यवहार और सतत जीवनशैली के प्रति सामूहिक प्रतिबद्धता जरूरी है। उन्होंने स्कूल ऑफ अर्थ साइंसेज की पहल की सराहना करते हुए कहा कि जलवायु परिवर्तन और सतत विकास जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर विश्वविद्यालय समुदाय के बीच संवाद को बढ़ावा देना समय की आवश्यकता है।*‘हैप्पी लिविंग’ के जरिए उपभोग की आदतों पर पुनर्विचार का आह्वान*प्रो. सोलंकी ने अपने संबोधन में ‘हैप्पी लिविंग’ की अवधारणा पर विस्तार से चर्चा की। उन्होंने विद्यार्थियों से अपने उपभोग के तौर-तरीकों पर पुनर्विचार करने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि तकनीक, सॉफ्टवेयर और स्वचालित प्रणालियां जीवन के प्रत्येक क्षेत्र में तेजी से विस्तार कर रही हैं, लेकिन दूसरी ओर वायु, जल और मिट्टी की गुणवत्ता लगातार प्रभावित हो रही है।बढ़ती जनसंख्या, घटती मृदा उर्वरता और खेती योग्य भूमि में कमी की ओर ध्यान आकर्षित करते हुए उन्होंने चेताया कि वर्तमान गति से होने वाला उपभोग आने वाली पीढ़ियों के लिए खाद्य एवं प्राकृतिक संसाधनों की उपलब्धता के सामने गंभीर चुनौती खड़ी कर सकता है।*‘बुखार से तप रही पृथ्वी’, अब तत्काल सुधारात्मक कदम जरूरी*पृथ्वी को ‘बुखार से तपती हुई पृथ्वी’ बताते हुए प्रो. सोलंकी ने कहा कि बढ़ता वैश्विक तापमान और जलवायु परिवर्तन अब दूर की आशंका नहीं, बल्कि हमारे सामने मौजूद वास्तविकता है। बाढ़ की बढ़ती घटनाएं, चरम मौसमी परिस्थितियां तथा वर्षा के बदलते और अनियमित स्वरूप इसके स्पष्ट संकेत हैं। उन्होंने कहा कि जलवायु परिवर्तन से निपटने के लिए अब तत्काल सुधारात्मक कदम उठाने की जरूरत है।उन्होंने विद्यार्थियों को दैनिक जीवन में छोटे लेकिन सार्थक बदलाव अपनाने के लिए प्रेरित किया। उदाहरण देते हुए उन्होंने बताया कि एक वर्ष तक नए कपड़े नहीं खरीदने से करीब 20 हजार लीटर पानी, 52.5 किलोग्राम कार्बन डाइऑक्साइड और 3.75 किलोग्राम रसायनों की बचत में योगदान दिया जा सकता है। उन्होंने कहा कि व्यक्तिगत स्तर पर लिए गए छोटे-छोटे निर्णय भी पर्यावरण संरक्षण में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं।*‘सीमाओं के भीतर उपभोग’ का संकल्प लेने का आह्वान*फाइनाइट अर्थ मूवमेंट के संस्थापक प्रो. सोलंकी ने विद्यार्थियों को ‘सीमाओं के भीतर उपभोग’ करने का संकल्प लेने के लिए प्रेरित किया। उन्होंने कहा कि सतत जीवनशैली का अर्थ खुशियों से समझौता करना नहीं है, बल्कि जिम्मेदार विकल्पों और सजग उपभोग के माध्यम से खुशी की अवधारणा को नए रूप में परिभाषित करना है।प्रो. सोलंकी वर्तमान में 13 मई से 20 अगस्त 2026 तक 100 दिवसीय भारत क्लाइमेट सत्याग्रह यात्रा का नेतृत्व कर रहे हैं। यात्रा के तहत वे भारत की चारों दिशाओं में स्थित प्रमुख मार्गों से होते हुए 51 शहरों की यात्रा कर रहे हैं। इस दौरान विशेष रूप से युवाओं सहित आमजन को जलवायु संरक्षण के लिए सार्थक कदम उठाने के प्रति जागरूक एवं प्रेरित किया जा रहा है।इससे पूर्व प्रो. सोलंकी का स्वागत करते हुए स्कूल ऑफ अर्थ साइंसेज के डीन प्रो. देवेश शर्मा ने संयुक्त राष्ट्र के सतत विकास लक्ष्यों (SDGs) के संदर्भ में संवाद की महत्ता पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि युवा पीढ़ी में पर्यावरण के प्रति जागरूकता विकसित करने और सतत जीवनशैली को प्रोत्साहित करने में शैक्षणिक संस्थानों की महत्वपूर्ण भूमिका है।संवाद सत्र ने विद्यार्थियों एवं प्रतिभागियों को जलवायु परिवर्तन और सतत विकास के क्षेत्र में देश के प्रमुख विचारकों में शामिल प्रो. सोलंकी के विचारों एवं अनुभवों से जुड़ने का अवसर प्रदान किया। आयोजन ने पर्यावरणीय जिम्मेदारी तथा सतत विकास लक्ष्यों के प्रति राजस्थान केंद्रीय विश्वविद्यालय की प्रतिबद्धता को भी रेखांकित किया।कार्यक्रम के अंत में पर्यावरण विज्ञान विभाग के विभागाध्यक्ष डॉ. प्रमोद कांबले ने धन्यवाद ज्ञापित किया। आयोजन सचिव डॉ. गरिमा कौशिक ने कार्यक्रम का संचालन किया।
